परिचय
राज चौक विचार और विश्लेषण का एक खुला मंच है।
चौक वह जगह है जहाँ रास्ते आकर मिलते हैं और लोग ठहरकर बात करते हैं। यह पत्रिका उसी विचार पर बनी है — समाज, राजनीति और संस्कृति पर सोचकर लिखी गई बात, एक ऐसी जगह पर जहाँ पहुँचने के लिए किसी अनुमति की ज़रूरत न हो।
यहाँ प्रकाशित हर लेख सबके लिए खुला है। पढ़ने के लिए न कोई खाता बनाना पड़ता है, न कोई शुल्क देना पड़ता है। कोई विज्ञापन नहीं, कोई पॉपअप नहीं।
लेख हमारे संपादक लिखते और प्रकाशित करते हैं। हम कम लिखते हैं, पर ठहरकर लिखते हैं — हर रोज़ की सुर्खियों के पीछे भागने के बजाय उन सवालों पर, जो कुछ हफ़्ते बाद भी उतने ही ज़रूरी रहें।